कांग्रेस नेता प्रियंक खड़गे ने पत्र में कहा कि आरएसएस देश भर में 60 हजार से अधिक शाखाओं और करोड़ों स्वयंसेवकों वाला एक विशाल संगठन होने का दावा करता है। ऐसे में उसे पारदर्शिता, जवाबदेही और संविधान के अनुरूप संचालन के सर्वोच्च मानकों का पालन करना चाहिए।
उन्होंने अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा (एबीपीएस) की 2025-26 की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि केवल कर्नाटक में ही आरएसएस की 4,127 दैनिक शाखाएं, 1,389 साप्ताहिक मिलन और 60 मासिक मंडलियां संचालित होती हैं। इसके अलावा 2,194 समाजोत्सवों में करीब 19.61 लाख लोगों की भागीदारी और 562 पथ संचलनों में 2.21 लाख से अधिक गणवेशधारी स्वयंसेवकों के शामिल होने का दावा किया गया है।
प्रियंक खड़गे ने कहा कि इतनी व्यापक गतिविधियों वाले संगठन को निजी या अनौपचारिक संस्था नहीं माना जा सकता। उन्होंने सवाल उठाया कि इतने बड़े पैमाने पर सार्वजनिक कार्यक्रम, पथ संचलन और जनसंपर्क गतिविधियां चलाने वाले संगठन की कानूनी स्थिति, वित्तीय स्रोत, सार्वजनिक जवाबदेही और संवैधानिक अनुपालन स्पष्ट होना चाहिए।












