देश लौटने की अटकलों के बीच बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने बुधवार को कहा कि 2024 का छात्र आंदोलन एक सुनियोजित राजनीतिक साजिश था। हसीना ने कहा कि वह स्वदेश लौटने के लिए दृढ़ संकल्पित हैं और इसके लिए गिरफ्तारी या मौत की सजा के जोखिम का सामना करने को भी तैयार हैं। वह पांच अगस्त, 2024 को ढाका छोड़कर भारत आई थीं।
देश छोड़कर भारत आने के बाद शेख हसीना ने पहली बार डिजिटल तरीके से प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित किया और अपने देश की मौजूदा स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि उनकी सरकार ने आंदोलन को शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाने की कोशिश की थी, लेकिन कुछ संगठित समूहों ने इसे हिंसक रूप दे दिया।
शेख हसीना ने कहा कि वह दिसंबर में स्वदेश लौटने के लिए दृढ़ संकल्पित हैं और इसके लिए गिरफ्तारी या मौत की सजा के जोखिम का सामना करने को भी तैयार हैं। हसीना ने कहा कि उनकी स्वदेश वापसी का उद्देश्य देश में ‘‘लोकतंत्र और न्याय बहाल करना’’ है। उन्होंने कहा, ‘‘मेरी वापसी सत्ता के लिए नहीं है, बल्कि बांग्लादेश को विकास, धर्मनिरपेक्षता और समृद्धि के रास्ते पर वापस लाने के लिए है।’’ हसीना ने कहा, ‘‘मुझे पता है, वे मुझे जेल में डाल सकते हैं या मेरी जान ले सकते हैं। मैं अपने लोगों के साथ रहने के लिए घर वापस जाऊंगी।’’
शेख हसीना ने कहा, “आज मैं सिर्फ उस व्यक्ति के रूप में नहीं बोल रही हूं, जिसे पांच बार बांग्लादेश का प्रधानमंत्री बनने का सम्मान मिला, बल्कि मैं शेख मुजीबुर्रहमान की बेटी के रूप में भी आपसे बात कर रही हूं। मैं वो शख्स हूं, जिसने अपना पूरा जीवन बांग्लादेश के लोगों के साथ बिताया है। मुझे अपने देश से दूर कर दिया गया, लेकिन मैं कभी अपने लोगों से अलग नहीं हुई। पिछले दो वर्षों से मैं अपने प्रिय बांग्लादेश को कठिन परिस्थितियों से गुजरते हुए देख रही हूं। डर लोगों के घरों, कार्यस्थलों और विश्वविद्यालय परिसरों तक पहुंच गया है। यह वह बांग्लादेश नहीं है, जिसे हमने मिलकर बनाया था। यह वह बांग्लादेश भी नहीं है, जिसके लिए 1971 में 30 लाख लोगों ने अपने प्राणों की आहुति दी थी।













