पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने पेपर लीक और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) के कामकाज को लेकर सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि आरटीआई और ऑडिट जैसी जवाबदेही तय करने वाली व्यवस्थाओं को कमजोर कर दिया गया है, ऐसे में जवाबदेही किसकी होगी। पप्पू यादव ने पूछा कि एनटीए के चेयरमैन को अब तक क्यों नहीं हटाया गया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2018 में एनटीए में नियुक्त एक वरिष्ठ अधिकारी पहले मध्य प्रदेश के शिक्षा विभाग में भी बड़े पद पर थे और लंबे समय से उसी व्यवस्था का हिस्सा बने हुए हैं।
उन्होंने कहा कि हर साल छह से आठ करोड़ आवेदन फॉर्म भरे जाते हैं और इसके जरिए बड़ी राशि एनटीए को मिलती है। ऐसे में एजेंसी की जवाबदेही तय होनी चाहिए। उन्होंने सवाल किया कि इस पूरे मामले की जांच कौन करेगा और विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन कौन करेगा। पप्पू यादव ने यह भी आरोप लगाया कि संजीव मुखिया को बरी कर दिया गया है और राज्यों के अधिकार भी छीन लिए गए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को केवल पेपर लीक तक सीमित रहने के बजाय एनटीए की कार्यप्रणाली और उसकी जवाबदेही पर भी स्पष्ट जवाब देना चाहिए।












