आर्थिक शोध संगठन ‘ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव’ (जीटीआरआई) ने बुधवार को कहा कि 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई लेनदेन पर ‘मर्चेंट डिस्काउंट रेट’ (एमडीआर) लगाए जाने से छोटे व्यापारी और कीमत को लेकर सतर्क रहने वाले उपभोक्ता फिर नकद भुगतान की ओर लौट सकते हैं।
व्यापारियों के लिए 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई भुगतान (पी2एम) पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर 15 अक्टूबर से लागू होगा। इस शुल्क की अधिकतम सीमा 300 रुपये होगी। इसके अलावा रेलवे, दूरसंचार सेवाओं, बीमा और ईंधन जैसे कुछ क्षेत्रों में 2,000 रुपये से अधिक के लेनदेन पर पांच रुपये का रियायती एमडीआर लागू होगा।
जीटीआरआई के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने सोशल मीडिया पर पोस्ट में कहा, ‘‘एमडीआर छोटे व्यापारियों और कीमत को लेकर सतर्क रहने वाले उपभोक्ताओं को फिर से नकदी की ओर धकेल सकता है।













