कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने शनिवार को निर्वाचन आयोग की ओर से जारी बयान के बाद कहा कि वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को तत्काल रोका जाए और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे या अभियोजन से कम कुछ भी स्वीकार्य नहीं है। रमेश ने यह आरोप भी लगाया कि निर्वाचन आयोग के बयान ने मतदाता सूची में गड़बड़ियों और मतदाताओं के नाम हटाए जाने से जुड़े गंभीर सवालों का जवाब नहीं दिया।
जयराम रमेश ने कहा कि हमारे लोकतंत्र को पहले ही भारी नुकसान पहुंचाने के बाद अब चुनाव आयोग डैमेज कंट्रोल मोड में है। उसने एक गोलमोल प्रेस नोट जारी किया है, जो उसकी नीयत, ईमानदारी, निष्पक्षता और विश्वसनीयता पर और भी सवाल खड़े करता है।
जयराम रमेश ने गोवा का जिक्र करते हुए कहा कि मतदाता सूची से हटाए गए 97 मतदाताओं में से 81 के लिए फिर से पंजीकरण के आवेदन पहले ही भरे जा चुके हैं। उन्होंने सवाल किया कि यदि मतदाताओं को एक खराब व्यवस्था के कारण मताधिकार से वंचित किया गया और बाद में उनके नाम फिर जोड़ दिए गए, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?
उच्चतम न्यायालय के 27 मई 2026 के आदेश का निर्वाचन आयोग द्वारा हवाला दिए जाने पर रमेश ने कहा कि यह आदेश हालिया खुलासों से पहले आया था। रमेश के अनुसार, आयोग का यह तर्क कथित तौर पर लक्षित मतदाताओं के नाम हटाए जाने और नागरिकों को मतदाता सूची से बाहर किए जाने से जुड़े सवालों का जवाब नहीं हो सकता।













