जहां विपक्ष ने पूरे देश में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं, वहीं बीजेपी की सहयोगी तेलुगु देशम, लोकजनशक्ति पार्टी (राम विलास) और राष्ट्रीय लोक मोर्चा ने भी चुनाव आयोग पर सवाल उठाए हैं। बता दें कि इंडियन एक्सप्रेस ने 23 सितंबर को प्रकाशित अपनी रिपोर्टर रितिका चोपड़ा की रिपोर्ट में खुलासा किया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने बीते 10 महीनों में कम से कम 14 बार अधिकारिक तौर पर उन फैसलों और ऐसे निर्देशों पर आपत्ति जताई थी जो उनकी जानकारी के बिना लिए गए थे जिनमें प्रक्रियाओं की बड़ी खामियां थीं।
शुक्रवार को केंद्रीय मंत्री और एलजेपी (राम विलास) के प्रमुख चिराग पासवान ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि, “अगर चुनाव आयोग—जो एक स्वतंत्र संवैधानिक संस्था है—उस पर सवाल उठाए जा रहे हैं, तो मुख्य चुनाव आयुक्त की ज़िम्मेदारी है कि वे अपना पक्ष साफ़ तौर पर रखें। अगर लोग चुनाव प्रक्रिया पर ही शक करने लगें, तो यह चिंता की बात है।“ उन्होंने यह भी जोड़ा कि “चुनाव आयोग को अपना पक्ष राहुल गांधी के सामने नहीं, बल्कि जनता के सामने रखना चाहिए। उन्हें लोगों के मन में मौजूद शंकाओं को दूर करना होगा।













