मोदी सरकार को छात्रों की मांग के आगे झुकना पड़ा है। नीट पेपर लीक लीक मामले को लेकर नई दिल्ली के जंतर मंतर समेत देशभर में जारी छात्रों के विरोध प्रदर्शन के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को अपना इस्तीफा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को भेज दिया है।
प्रधान ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर अपने इस्तीफे की घोषणा करते हुए कहा कि उन्होंने अपना त्यागपत्र प्रधानमंत्री को भेज दिया है। उन्होंने कहा, ‘‘पिछले 10 दिन का घटनाक्रम देखकर मेरा मन दुखी है। यह मेरे लिए व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का विषय नहीं है।’’
प्रधान ने कहा कि उन्होंने पहले दिन से ही जिम्मेदारी ली है और इस परिस्थिति से कभी मुंह नहीं मोड़ा।
उन्होंने लिखा, ‘‘जंतर-मंतर पर और देश में जो स्थिति बनी है, इस स्थिति का राष्ट्र विरोधी ताकतें लाभ ना उठाएं, देश की एकता बनी रहे, भारत के एक भी विद्यार्थी का भविष्य कानूनी पेचीदगियों में ना उलझे, हमारे बच्चे अपना समय पढ़ाई में लगाएं, करियर बनाने पर ध्यान केंद्रित करें, इसी बात पर विचार करते हुए मैंने अपना त्यागपत्र प्रधानमंत्री को भेज दिया है।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद जंतर मंतर पर जश्न का माहौल देखने को मिला। इस दौरान सीजेपी के अध्यक्ष अभिजीत दिपके ने कहा कि ये लोकतंत्र की जीत है, सरकार कहती थी कि इस्तीफे नहीं होते, झुकती है दुनिया, झुकाने वाला चाहिए। दिपके ने कहा ये जीत उनकी है जिनकी जान धर्मेंद्र प्रधान ने ली।
अभिजीत दिपके ने कहा कि ये तो एक ही मांग पूरी हुई है, अभी दो मांगे और है उसे भी पूरा करना पड़ेगा। वो है कि पहले तो पीड़ित परिवारों को 1 करोड़ का मुआवजा देना होगा, दूसरा जिन छात्रों पर पुलिस ने कार्रवाई की उन्हें सजा मिले। और सारे केस छात्रों के खिलाफ हुए हैं वो वापस होने चाहिए।
अभिजीत ने कहा कि हम कॉकरोच हैं इतनी आसानी से नहीं जा सकते, एक बार घुस गए तो बाहर निकलना मुश्किल है।












