चिराग पासवान ने एससी/एसटी आरक्षण में ‘क्रीमी लेयर’ प्रावधान लागू करने की मांग का विरोध करते हुए कहा कि ऐसे कदम की वकालत करने वालों को पहले अपने पदों से इस्तीफा दे देना चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आरक्षण नीति आर्थिक स्थिति पर आधारित नहीं है, बल्कि सदियों से चले आ रहे सामाजिक भेदभाव, बहिष्कार और अस्पृश्यता को दूर करने के लिए बनाई गई है। उन्होंने कहा कि ढांचे में किसी भी तरह के बदलाव का प्रस्ताव अत्यंत संवेदनशील है और इसे संसद में बहस के लिए पेश किया जाना चाहिए, न कि इसे राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित कर दिया जाना चाहिए।
चिराग पासवान ने मांझी परिवार पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि मैं ‘ऊपरी’ तबकों के लिए आरक्षण की बात नहीं कर रहा हूं। मैं एससी और एसटी के लोगों को आरक्षण देने की बात कर रहा हूं। उनके बारे में लोग पूछते हैं, “क्रीमी लेयर’ का प्रोविज़न क्यों नहीं है?” ठीक है, तो उन्हें इसे छोड़ देना चाहिए- उन्हें रिज़र्वेशन का फ़ायदा लेना बंद कर देना चाहिए… अगर जीतन राम मांझी को लगता है कि ये उपाय लागू होने चाहिए, तो क्या उन्हें पहले इस्तीफ़ा नहीं देना चाहिए? उन्हें ‘क्रीमी लेयर’ कॉन्सेप्ट लाने दें- आखिरकार, वह भी उसी कैटेगरी में आएंगे, है ना? उन्हें इस्तीफ़ा दे देना चाहिए, और उनके बेटे को- जो बिहार में मंत्री हैं- को भी इस्तीफा दे देना चाहिए।
वहीं चिराग पासवान के बयान पर पलटवार करते हुए केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने कहा, ” इस रुख की वजह से लोग आरक्षण के फायदों से दूर हो जाएंगे। हालांकि, हमारा मानना है कि यह बंटवारा बड़े पैमाने पर लोगों के हित में जरूरी है। क्योंकि उन्हें हमारे गरीब लोगों की परवाह नहीं है, इसलिए उन्हें इस्तीफ़ा दे देना चाहिए।












