समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने बुधवार को चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठाए। अखिलेश यादव ने कहा कि चुनाव आयोग की निष्पक्षता को लेकर अब राजनीतिक दल ही नहीं बल्कि जनता के बीच भी सवाल खड़े हो रहे हैं। उन्होंने सवाल किया कि आखिर चुनाव आयोग किसके इशारे पर काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि यदि किसी स्वतंत्र संवैधानिक संस्था के सदस्यों को अपने फैसलों पर असहमति दर्ज कराने के बावजूद सुनवाई नहीं मिलती है तो यह लोकतंत्र के लिए गंभीर स्थिति है।
एसपी प्रमुख अखिलेश यादव ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों से यह सवाल खड़ा होता है कि आखिर निर्वाचन आयोग किस तरह काम कर रहा है। उनके मुताबिक, चुनाव आयोग का ऐसा व्यवहार लोकतंत्र के लिए घातक है और इससे देश में हुए चुनावों और उनसे बनी सरकारों की निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं। उन्होंने कहा कि यदि आयोग के भीतर ही उसके सदस्यों के बीच फैसलों को लेकर गंभीर मतभेद सामने आ रहे हैं तो यह सामान्य स्थिति नहीं है।
अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि कुछ लोग सत्ता की कठपुतली बनकर काम कर रहे हैं और सत्ता में बने रहने के लिए लोकतांत्रिक व्यवस्था के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। उन्होंने यूपी विधानसभा चुनाव-2022 का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि उस चुनाव के दौरान एसपी के समर्थन वाले मतदाताओं को चिह्नित कर उनके नाम मतदाता सूची से हटाए गए। उन्होंने कहा कि पार्टी ने इस संबंध में हलफनामे के साथ शिकायत भी की लेकिन किसी भी अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई।
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में हुए उपचुनावों के दौरान भी एसपी ने चुनाव प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए थे। अखिलेश के मुताबिक, शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं होने से यह सवाल और गंभीर होता है कि आखिर चुनावी प्रक्रिया में जवाबदेही किसकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ मामलों में ऐसे लोगों के हस्ताक्षर बनाए गए जो खुद हस्ताक्षर नहीं कर सकते थे और इसके आधार पर बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम काटे गए। उन्होंने सवाल उठाया कि इस तरह की शिकायतें सामने आने के बाद भी यदि किसी अधिकारी पर कार्रवाई नहीं होती है तो इससे चुनाव व्यवस्था में जनता के भरोसे पर असर पड़ता है।













