झारखंड में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दौरान वोटर लिस्ट में तीन अफगान नागरिकों के नाम सामने आने के बाद सियासत तेज हो गई है। सत्ताधारी झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) ने इस मुद्दे पर सीधे तौर पर केंद्रीय गृह मंत्रालय को कटघरे में खड़ा किया है।
रांची में जेएमएम प्रवक्ता मनोज पांडे ने वोटर लिस्ट में तीन अफगान नागरिकों के नाम शामिल होने के मामले पर कहा, “सबसे पहले, गृह मंत्रालय से यह पूछा जाना चाहिए कि अफगान नागरिक यहां कैसे रह रहे थे, किसकी इजाजत से रह रहे थे और क्या उनके वीजा वैध थे या नहीं। इसकी जांच कौन करेगा? क्या हेमंत सोरेन इसकी जांच करेंगे? कौन देखेगा कि कोई विदेशी नागरिक कहां से आ रहा है, कहां जा रहा है, किसकी इजाजत से जा रहा है और उनकी गतिविधियों का मकसद क्या है? इन सभी चीजों पर नजर रखने के लिए एक विभाग है- गृह विभाग, जो विदेश मंत्रालय के साथ मिलकर काम करता है। यह कैसे हुआ? सबसे पहले गृह मंत्रालय को यह साफ करना चाहिए कि वे लोग किसकी इजाजत से आए थे।
जेपीएससी और एएसएससी मामले को लेकर मनोज पांडे ने पूर्व की BJP सरकारों पर हमला बोला। उन्होंने कहा, “उस समय, 2000 से 2023 के बीच जो रिपोर्टें आईं— जब बाबूलाल मरांडी और फिर अर्जुन मुंडा सत्ता में थे- उनसे यह साबित हो चुका था कि नियुक्तियां पैसे और रसूख के आधार पर की गई थीं। कितना पैसा लिया गया था? उस समय ऐसी रिपोर्टें आई थीं कि 1 करोड़ रुपये लिए गए थे। आज, कम से कम हमारी राज्य एजेंसी ने इन बातों का खुलासा किया है। अब सब कुछ सामने आ रहा है। ये तथ्य सार्वजनिक हो रहे हैं और पता चल रहा है कि इसमें कौन-कौन शामिल था। उस समय राजनीतिक दखलंदाजी थी और ऊंचे पदों पर बैठे लोग इसमें शामिल थे। आज इसमें किसी राजनेता का नाम सामने नहीं आया है। किसी राजनेता ने अपने भाई या भतीजे को नियुक्त नहीं करवाया है।













