नई दिल्ली: ‘इंडिया हिस्ट्री फोरम’ के तत्वावधान में इंडिया इस्लामिक कल्चरल सेंटर में एक भव्य दो दिवसीय सम्मेलन का शुभारंभ हुआ। यह सम्मेलन “भारत के इतिहास, समाज और सभ्यता के विकास में मुसलमानों की भूमिका” के मुख्य विषय के तहत आयोजित किया जा रहा है। कार्यक्रम के पहले दिन शशि थरूर (सांसद, लोकसभा), सैयद सआदतुल्लाह हुसैनी (अध्यक्ष, जमाअत-ए-इस्लामी हिंद), गुरदीप सिंह सप्पल (कांग्रेस नेता), मोहम्मद अदीब (पूर्व राज्यसभा सांसद), मनोज कुमार झा (सांसद, राज्यसभा), अशोक कुमार पांडे (लेखक), डॉ. शादाब मूसा (संयोजक, इंडिया हिस्ट्री फोरम) और अन्य विशेषज्ञों एवं महत्वपूर्ण हस्तियों ने अपने विचार साझा किए।
इस अवसर पर सांसद शशि थरूर ने कहा कि, “हमारे इतिहास में बहुत कुछ है। बहुत सी गलत और काल्पनिक कहानियों को भी इतिहास का हिस्सा बनाने की कोशिशें होती हैं। इन परिस्थितियों में इतिहास के सही नैरेटिव को समझना, सच्चाई तक पहुंचना और उसे समाज तक पहुंचाना बेहद जरूरी है।”
जमाअत-ए-इस्लामी हिंद के अध्यक्ष, सैयद सआदतुल्लाह हुसैनी ने कहा कि, “इतिहास किसी भी राष्ट्र और देश के लिए बहुत महत्व रखता है। इतिहास केवल सूचना नहीं है बल्कि इसके आधार पर भविष्य का निर्माण होता है। हमारा देश भारत, इतिहास के उस महत्वपूर्ण हिस्से को जो इस्लाम और मुसलमानों की महान ऐतिहासिक सेवाओं से संबंधित है भूल न जाए, सामूहिक विस्मृति (Collective Amnesia) का शिकार न हो जाए और इसमें व्यक्तियों की व्यक्तिगत पसंद-नापसंद शामिल न हो, इसके लिए इस तरह के सम्मेलन और कार्यक्रम बेहद महत्वपूर्ण हैं। आज इतिहास को एक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। ऐसे में मुसलमानों और न्यायप्रिय व्यक्तियों को आगे आकर इतिहास के सही नैरेटिव को दुनिया के सामने पेश करना चाहिए।”
राज्यसभा सांसद मनोज कुमार झा ने कहा कि “आज इतिहास को बदलने की कोशिश की जा रही है, जो देश के लोकतंत्र के लिए खतरनाक है। हमारा इतिहास हमारी संपत्ति है, इसकी रक्षा करना हम सबकी जिम्मेदारी है।”
कांग्रेस नेता गुरदीप सिंह सप्पल ने कहा कि “आज इतिहास को बदलने की कोशिश देश में दुर्भाग्यपूर्ण स्तर तक पहुंच गई है।” वहीं, पूर्व सांसद मोहम्मद अदीब ने कहा कि “जब किसी सभ्यता को खत्म करना हो तो इतिहास बदल दिया जाता है। यही काम आज हो रहा है, जिससे हमारी पहचान को खतरा पैदा हो सकता है।”
सम्मेलन में विभिन्न इतिहासकारों और विशेषज्ञों द्वारा अर्थव्यवस्था, व्यापार, समाजशास्त्र और राजनीति जैसे क्षेत्रों में मुसलमानों के योगदान पर शैक्षणिक और शोध पत्र प्रस्तुत किए गए। इस अवसर पर एक विशेष सत्र “मुस्लिम महिलाओं की ऐतिहासिक भूमिका” पर भी आयोजित किया गया।
सम्मेलन में देश के विभिन्न हिस्सों से आए विद्वानों, बुद्धिजीवियों, शोधार्थियों, धार्मिक नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और आम जनता ने बड़ी संख्या में भाग लिया। प्रतिभागियों ने संकल्प लिया कि वे अपनी क्षमता के अनुसार देश में इतिहास के सही नैरेटिव के माध्यम से देश और समाज के भविष्य के निर्माण में अपनी भूमिका निभाएंगे।












