सुप्रीम कोर्ट ने हल्द्वानी के बनभूलपुरा में रेलवे की जमीन पर अतिक्रमण हटाने के मामले में मंगलवार को बड़ा आदेश दिया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि जमीन रेलवे की है और वहां रहने वालों को अतिक्रमण हटाना होगा, क्योंकि यह सरकारी संपत्ति है और रेलवे को इसका उपयोग तय करने का पूरा अधिकार है। कोर्ट ने कहा कि अतिक्रमण करने वालों को यह हक नहीं है कि वे उसी जगह पर रहने की मांग करें या रेलवे को जमीन के इस्तेमाल का फैसला बताएं।
इसके साथ ही चीफ जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने उत्तराखंड विधिक सेवा प्राधिकरण को निर्देश दिया कि वह बलभनपूरा में एक शिविर लगाए, ताकि रेलवे परियोजना के लिए आवश्यक सरकारी जमीन पर रह रहे और बेदखली का सामना कर रहे परिवार प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पुनर्वास के लिए आवेदन कर सकें। कोर्ट ने निर्देश दिए कि प्रभावित परिवारों की सूची तैयार की जाए, खासकर ईडब्ल्यूएस (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग) के लोगों को पीएमएवाई के तहत आवास के लिए अप्लाई करने में मदद मिले।
कोर्ट ने आदेश दिया कि नैनीताल जिले की रेवेन्यू अथॉरिटी, केंद्र और राज्य सरकार मिलकर एक सप्ताह का कैंप लगाएं, जहां पीएमएवाई के फॉर्म भरे जा सकें। यह कैंप 15 मार्च के बाद लगाया जाए, क्योंकि लोगों ने इसे रमजान के बाद आयोजित करने की मांग की थी। कोर्ट ने कहा कि बनभूलपुरा में पुनर्वास केंद्र बनाया जाए, जहां हर परिवार का मुखिया जाकर फॉर्म भर सके। नैनीताल के जिलाधिकारी और एसडीएम हल्द्वानी को लॉजिस्टिक्स सपोर्ट देने के निर्देश दिए गए।












