भारत के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की नाराजगी के बाद ‘ज्यूडीशियल करप्शन’ चैप्टर वाली एनसीईआरटी की किताब की बिक्री पर रोक लग गई है। चीफ जस्टिस के कड़े रुख के बाद एनसीईआरटी ने ये फैसला लिया है। इससे पहले आज इस मुद्दे पर नाराजगी जताते हुए चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा था कि किसी को भी न्यायपालिका को बदनाम करने की इजाजत नहीं दी जाएगी।
एनसीईआरटी की 8वीं क्लास की सोशल साइंस का पार्ट 2 किताब इसी हफ्ते जारी हुई थी। चीफ जस्टिस की टिप्पणी के बाद ये किताब एनसीईआरटी की वेबसाइट पर उपलब्ध नहीं है। एक न्यूज रिपोर्ट के मुताबिक, किताबों की ऑफलाइन बिक्री भी मंगलवार 24 फरवरी से बंद कर दी गई है। हालांकि अब तक एनसीईआरटी की तरफ से इसको लेकर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने बुधवार को राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) के कक्षा आठ के पाठ्यक्रम में न्यायपालिका में भ्रष्टाचार पर एक अध्याय को शामिल करने पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि इस धरती पर किसी को भी न्यायपालिका को बदनाम करने और उसकी शुचिता को धूमिल नहीं करने दिया जाएगा।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की तीन न्यायाधीशों की पीठ ने वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और अभिषेक सिंघवी द्वारा मामले को तत्काल विचार के लिए उल्लेखित किये जाने के बाद एनसीईआरटी की पाठ्यपुस्तकों में न्यायपालिका के बारे में “आपत्तिजनक” बयानों का स्वतः संज्ञान लिया।












